हनुमान के श्री राम का 🚩 स्वागत बारम्बार है 🚩 त्रेता युग के स्वामी राम का 🚩 कल युग में जय जयकार है🚩🚩 अंकित के कलम से✍🏻
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अंकित के कलम से...
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अजीब द्वंद है छिड़ा आज इस दौड़ में .. इंसान इंसान को बना रहा गुनाहगार यहा.. क्या ग़लत क्या सही जाने कौन सा प्रश्न है छिपा इस संसार के गर्भ में ... छूत अछूत का खेल सारा नाम का रह गया ... आज खुद अपनो को मार रहा इंसान है... क्या ग़लत क्या सही किसने यहा पर क्या किया .. .भूल बैठा मनुष्य खुद को समझ रहा भगवान है... आज जो लगाए आरोप क्या खुद भी बच पायेगा वो... है दशा विकट यहा ना कोई बच पाएगा, फिर क्यों दूसरो को गुनाहगार है बना रहा??? है डर इतना तो बेड़ियों से जकरे वह स्वयं को , दूसरो को क्यों वो ऐसे है तड़पा रहा... बंद करो ये अपना होने का ढोंग भगवान से है क्या छिपा .. दूसरो को बोलने से पहले खुद के गिरेबान में झांक जरा ... भगवान भी है खुश कुछ तो ऐसा किया लोगो के चेहरे से नकाब अच्छाई का उतरा ... सच झूठ की दुनिया में झूठ से पर्दा उठ रहा.. फिर भी अनिश्चित विचलित जग निरुत्तर सा है खड़ा... अजीब द्वंद है छिड़ा क्या है रहस्य इस दौर में... ...