टूट  कर  बिखर  गया था  सूखे पत्तों  की तरह, 
आसमां  से बरस  पड़े  क्यूँ अमृत बूंदो  की तरह, 
दे  सहारा  उठा लिया  जब पहरेदारो  की तरह, 
इश्क़  की खाई  में क्यूँ फिर गिराया बेदर्दी की तरह।।

                                            अंकित के कलम से..