इश्क़  के  रास्ते  में  जो चल पड़े  थे  नंगे  पाँव ,
आज जब टूटा  तिलिस्म  तो , 
दिखने  लगे  पग  के  घाव ,
आसान  नहीं  ऐसे सफर ,
ना  इस  पथ  पर  तरुवर  की  छाँव ,
तय  करूँ  इस सफर को और ,
या  डुबो  दूँ  इस सफर  की  नांव ?

                         अंकित के ✍️ से....