श्रृंगार रस का प्यार छोड़ ,जब वात्सल्य छाव पाया
कालिदास ने,
विश्व अभिनन्दन करने लगा, उस आत्मविश्वासी , आत्मसंयमी की,
ज़िंदगी केवल यवन की जोश नहीं, नहीं प्यार की एकतरफा कहनी, छोड़ उस झूठी बेवफ़ा को ,गढ़ ले अपनी नई जिंदगी ||
                    
                  अंकित के ✍️ से....